
मुलेठी – गले और आवाज़ के लिए मीठी जड़
मुलेठी – आयुर्वेद में यष्टिमधु कहलाने वाली मीठी, ठंडी जड़, जिसे सदियों से गले की खराश और बैठी हुई आवाज़ के लिए चबाया जाता रहा है — और क्यों यह हर किसी के लिए रोज़ की चीज़ नहीं है।
2 अगस्त 2026 · 6 मिनट पढ़ें🌿 मुलेठी के बारे में जानकारी
मुलेठी किसी झाड़ीनुमा फलीदार पौधे की सूखी जड़ है, जिसे संस्कृत में यष्टिमधु यानी “मीठी डंडी” कहा गया है। यह नाम बिल्कुल सटीक है — इस जड़ में बिना चीनी मिलाए ही एक गहरी, टिकने वाली मिठास होती है।
बाज़ार में यह पतली सफ़ेदी लिए हुए डंडियों, दरदरे टुकड़ों या बारीक पाउडर के रूप में मिलती है। दादी-नानी के ज़माने से ही रेलवे स्टेशनों और मोहल्ले की पंसारी दुकानों पर मुलेठी की डंडी बिकती आई है — गला बैठ जाए या खराश हो, तो सबसे पहला नुस्खा यही होता था।
✨ यह क्यों खास है
- 🍬 बिना चीनी के भी चीनी से 30–50 गुना ज़्यादा मीठी — यह मिठास ग्लिसराइज़िन नाम के तत्व से आती है
- 🕊️ गले पर परत जमाकर आराम देती है, बाकी मसालों की तरह तेज़ या गरम तासीर की नहीं
- 🎙️ बहुत कम जड़ी-बूटियाँ ऐसी हैं जो जीवनीय (ताकत देने वाली) और कंठ्य (आवाज़ ठीक करने वाली) दोनों मानी जाती हैं
- 🚉 आज भी रेलवे स्टेशनों और ठेलों पर मुलेठी की डंडी बिकती मिल जाती है
- 🌱 यह पत्ता या बीज नहीं, असल में एक जड़ है — घर की बाकी जड़ी-बूटियों से अलग
🏺 पारंपरिक / आयुर्वेदिक उपयोग
रस (स्वाद): मधुर (मीठा) वीर्य (शक्ति): शीत (ठंडा) विपाक (पाचन के बाद): मधुर (मीठा) दोष प्रभाव: वात और पित्त को शांत करती है; ज़्यादा मात्रा में कफ बढ़ा सकती है
शास्त्रीय उपयोग:
- चरक संहिता में यष्टिमधु को दस जीवनीय (ताकत देने वाली) जड़ी-बूटियों में गिना गया है
- कंठ्य — यानी खासतौर पर आवाज़ को साफ़ और मज़बूत करने के लिए बताई गई
- यष्टिमधु चूर्ण का मुख्य घटक, गले और आवाज़ के लिए एक पुराना शास्त्रीय चूर्ण
- सूखी खाँसी में परंपरागत रूप से शहद के साथ ली जाती रही है
- ठंडी तासीर की वजह से पित्त-जनित गले और आँखों की तकलीफ़ों में उपयोगी मानी गई
💪 लाभ / स्वास्थ्य प्रभाव
- ✅ गले को आराम: गला खराब हो या खरखराहट हो, तो इसकी परत जमाने वाली प्रकृति राहत देने में मदद कर सकती है
- ✅ आवाज़: गायक और बोलने वाले लोग सदियों से बैठी आवाज़ के लिए इसका सहारा लेते रहे हैं
- ✅ पेट की परत को सहारा: आमाशय की भीतरी परत को सहारा देने पर कुछ अध्ययन हुए हैं
- ✅ खाँसी: शहद के साथ लेने पर सूखी, जलन भरी खाँसी में राहत में मदद कर सकती है
- ✅ परंपरागत ताकत: जीवनीय गण में शामिल होने की वजह से इसे सामान्य ताकत और रिकवरी से जोड़ा जाता रहा है
ये सभी परंपरागत उपयोग हैं, कुछ पर शुरुआती आधुनिक शोध भी हुआ है। मुलेठी एक आराम देने वाली जड़ी-बूटी है, किसी बीमारी का इलाज नहीं — और नीचे दी सावधानियों की वजह से इसे यूँ ही रोज़-रोज़ लेने वाली चीज़ भी नहीं समझना चाहिए।
🥄 जड़ के अंदर क्या है
| तत्व | भूमिका |
|---|---|
| ग्लिसराइज़िन | सूखी जड़ का 2–9% हिस्सा; इसकी मिठास और असर, दोनों की जड़ यही है |
| फ्लेवोनॉइड्स | गले को आराम देने वाले, एंटीऑक्सीडेंट गुणों से जुड़े |
| पॉलीसैकेराइड्स और चिपचिपा तत्व | गले पर परत जमाने वाली बनावट इन्हीं से आती है |
चूँकि ग्लिसराइज़िन ही बीपी बढ़ाने वाला असल कारण है, इसलिए डीग्लिसराइज़ीनेटेड लिकोरिस (DGL) नाम का एक अलग प्रोसेस्ड रूप भी मिलता है, जिसमें यह तत्व निकाल दिया जाता है। यह चबाने वाली साबुत डंडी से बिल्कुल अलग उत्पाद है।
🔄 तुलना: मुलेठी बनाम तुलसी – गले के दो उपाय
| विशेषता | मुलेठी | तुलसी |
|---|---|---|
| स्वाद | मीठा | तीखा, कड़वा |
| तासीर | शीत (ठंडी) | उष्ण (गरम) |
| असर | परत जमाकर गले को शांत करती है | बलगम निकालने में मदद करती है |
| सबसे उपयुक्त | सूखा, जलन भरा गला | बलगम वाली, बंद खाँसी |
| दोष प्रभाव | वात-पित्त शांत | कफ-वात शांत |
| परंपरा में रोज़ लिया जाना | नहीं — ग्लिसराइज़िन की वजह से सीमित | हाँ — घरों में रोज़ की चाय |
काढ़े में अक्सर दोनों साथ डाली जाती हैं, पर दोनों अलग तरह की खाँसी के लिए हैं — सूखेपन के लिए मुलेठी, बंद नाक-बलगम के लिए तुलसी।
🥄 उपयोग / तैयारी के तरीके
- 🌿 डंडी चबाना: मुलेठी की एक छोटी सूखी डंडी धीरे-धीरे चबाना, वही पुराना रेलवे-स्टेशन वाला नुस्खा
- 🥄 शहद के साथ पाउडर: ¼–½ चम्मच मुलेठी पाउडर एक चम्मच शहद में मिलाकर, सूखी खाँसी में
- ☕ गुनगुना काढ़ा: ¼ चम्मच पाउडर या जड़ का एक टुकड़ा गरम पानी में 5–10 मिनट भिगोकर, छानकर पिएँ
- 🍲 काढ़े में डालना: अदरक और तुलसी के साथ मुलेठी का एक टुकड़ा भी उबाला जा सकता है
⚠️ सावधानियाँ / चेतावनी
यह हिस्सा हल्के में लेने वाला नहीं है।
- ❗ मुलेठी का ग्लिसराइज़िन शरीर में सोडियम रोकता और पोटैशियम घटाता है, जिससे बीपी बढ़ता है — यह कोई काल्पनिक डर नहीं, बल्कि एक जानी-मानी, सिद्ध औषधीय प्रतिक्रिया है
- ❗ हाई बीपी, हृदय रोग या गुर्दे की बीमारी वालों के लिए उपयुक्त नहीं
- ❗ गर्भावस्था में डॉक्टर की सलाह के बिना लेने की सलाह नहीं दी जाती
- ❗ लगातार रोज़ाना 4–6 हफ़्तों से ज़्यादा लेना, बिना चिकित्सकीय निगरानी के ठीक नहीं — भले ही किसी को कोई मौजूदा बीमारी न हो
- ❗ मूत्रवर्धक (diuretics) और स्टेरॉयड दवाओं के साथ इसका असर बढ़ सकता है, जिससे पोटैशियम और बीपी की समस्या और बढ़ सकती है
- ⚠️ DGL (ग्लिसराइज़िन-रहित मुलेठी) यह खतरा हटा देती है, पर वह साबुत जड़ से अलग उत्पाद है
अगर ऊपर बताई गई कोई भी स्थिति हो, तो मुलेठी को कम मात्रा में नहीं, बिल्कुल छोड़ देना ही बेहतर है।
🎉 रोचक तथ्य / ट्रिविया
- 🍬 यूरोप की मशहूर लिकोरिस मिठाइयाँ भी इसी पौधे से बनती हैं — वही जड़ जो आयुर्वेद में यष्टिमधु है
- 🏭 ग्लिसराइज़िन का इस्तेमाल उद्योगों में प्राकृतिक मिठास और झाग बनाने वाले तत्व के रूप में भी होता है
- 🪥 टूथब्रश आने से पहले भारत के कई हिस्सों में मुलेठी की डंडी ही दाँत साफ़ करने के काम आती थी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: क्या मुलेठी रोज़ ले सकते हैं? उत्तर: लंबे समय तक रोज़ लेना ठीक नहीं। इसमें मौजूद ग्लिसराइज़िन की वजह से 4–6 हफ़्तों से ज़्यादा रोज़ाना सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के उचित नहीं, चाहे तबीयत बिल्कुल ठीक ही क्यों न हो। इसे रोज़ की आदत के बजाय कभी-कभार का घरेलू नुस्खा ही समझें।
प्रश्न: बच्चों को मुलेठी दे सकते हैं? उत्तर: कभी-कभार, थोड़ी मात्रा में डंडी चबाना पुराना रिवाज़ है, पर बड़ों की तरह बच्चों पर भी ग्लिसराइज़िन का असर होता है, इसलिए इसे रोज़ की आदत न बनाएँ और ज़्यादा इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
प्रश्न: मुलेठी और मिश्री में क्या फ़र्क़ है? उत्तर: मिश्री शक्कर से बनी होती है, जबकि मुलेठी एक जड़ है जो बिना किसी शक्कर के अपने आप मीठी होती है। दोनों गले को थोड़ा आराम देती हैं, पर मुलेठी की मिठास और असर, दोनों अलग वजह से आते हैं।
प्रश्न: क्या मुलेठी से बीपी बढ़ता है? उत्तर: लगातार या ज़्यादा मात्रा में ली जाए तो हाँ, बढ़ सकता है। यह शरीर में सोडियम रोकने और पोटैशियम घटाने की वजह से होता है, इसलिए जिन्हें पहले से बीपी की शिकायत है, उन्हें इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है।
प्रश्न: खाँसी में मुलेठी कैसे लें? उत्तर: सूखी खाँसी में सबसे आसान तरीका है ¼–½ चम्मच मुलेठी पाउडर को शहद के साथ चाटना, या फिर काढ़े में अदरक-तुलसी के साथ जड़ का एक टुकड़ा डालकर उबालना। चाय के तौर पर बनाने का पूरा तरीक़ा और कितने दिन तक लेनी है, यह गले की खराश के लिए मुलेठी वाले नुस्ख़े में दिया गया है।
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📚 स्रोत
- चरक संहिता — यष्टिमधु को जीवनीय दशेमानि (दस ताकत देने वाली जड़ी-बूटियों) में शामिल किया गया है
- भावप्रकाश निघंटु — यष्टिमधु (मुलेठी) का पारंपरिक वर्गीकरण
- Glycyrrhiza glabra और ग्लिसराइज़िन की सुरक्षा और औषधीय समीक्षाएँ, जिनमें इसके स्यूडोएल्डोस्टेरोनिज़्म से जुड़े प्रभाव शामिल हैं, फार्माकोग्नॉसी और नैदानिक पोषण से जुड़ी शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित