त्रिफला कब्ज़ व पाचन के लिए
आंवला, हरड़ और बहेड़ा से बना त्रिफला कब्ज़ से राहत और पाचन सुधारने में मदद करता है।
21 अगस्त 2025 · 2 मिनट पढ़ेंएक मिश्रण, तीन फल
त्रिफला एक आयुर्वेदिक मिश्रण है जो तीन फलों – आंवला (Amalaki), बहेड़ा (Bibhitaki) और हरड़ (Haritaki) से बनता है। त्रिफला पाचन सुधारने, हल्के रेचक (laxative) की तरह काम करने और शरीर की सफ़ाई के लिए जाना जाता है।
🌱 क्यों असरदार है
- आंवला (Amalaki): विटामिन C से भरपूर, पाचन को मजबूत करता है।
- बहेड़ा (Bibhitaki): शास्त्रीय रूप से आँतों की सफ़ाई से जोड़ा जाता है।
- हरड़ (Haritaki): हल्का प्राकृतिक रेचक, आंतों को स्वस्थ रखता है।
🥄 सेवन विधि
विकल्प 1: त्रिफला पानी (रातभर भिगोकर)
- 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को रातभर एक गिलास पानी में भिगो दें।
- सुबह छानकर खाली पेट पिएँ।
विकल्प 2: त्रिफला चाय
- 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण को 2 कप पानी में उबालें जब तक आधा रह जाए।
- छानकर रात को सोने से पहले पिएँ।
विकल्प 3: त्रिफला शहद के साथ
- ½ चम्मच त्रिफला चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ मिलाएँ।
- सोने से पहले लें।
🍵 मात्रा
- बड़े: ½–1 चम्मच प्रतिदिन।
- बच्चे (10 वर्ष से ऊपर): ¼ चम्मच प्रतिदिन।
🕒 कब लें
- सोने से पहले कब्ज़ राहत के लिए
- सुबह खाली पेट, पारंपरिक तरीक़े से
- नियमित पाचन सुधारने के लिए
✅ लाभ
- प्राकृतिक रूप से कब्ज़ दूर करता है
- पाचन और मेटाबॉलिज़्म सुधारता है
- शास्त्रीय रूप से शोधन श्रेणी में रखा गया है
- वजन संतुलन में सहायक
- शास्त्रीय रूप से रसायन माना जाता है
⚠️ सावधानियाँ
- अधिक सेवन से दस्त हो सकते हैं।
- गर्भवती महिलाएँ बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
- 10 वर्ष से कम बच्चों को डॉक्टर से पूछकर ही दें।
